ज्योतिष शास्त्र: आधारभूत तत्व एवं शाखाएँ
ज्योतिष शास्त्र के मूल तत्व
1. ग्रह (Planets) - नवग्रह
वैदिक ज्योतिष में मुख्य रूप से **9 ग्रह** माने गए हैं, जो मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
2.राशियाँ (Zodiac Signs) - 12 भाग
आकाशमंडल को **12 भागों** में बांटा गया है, जिन्हें राशियाँ कहते हैं। ये राशियाँ किसी व्यक्ति के स्वभाव और गुणों को दर्शाती हैं।
3. नक्षत्र (Constellations) - 27 तारामंडल
कुल **27 नक्षत्र** होते हैं। प्रत्येक नक्षत्र लगभग 13 डिग्री 20 मिनट का होता है। नक्षत्रों को ग्रहों से अधिक सूक्ष्म माना जाता है और ये व्यक्ति के जन्म के समय की सटीक ऊर्जा को दर्शाते हैं। (सभी 27 नक्षत्रों के बारे में और जानें...)
4. भाव/घर (Houses) - जीवन के 12 क्षेत्र
कुंडली में **12 भाव** होते हैं, जो जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
पहला भाव: व्यक्तित्व, शरीर, स्वास्थ्य।
दूसरा भाव: धन, परिवार, वाणी।
तीसरा भाव: पराक्रम, छोटे भाई-बहन, संचार।
चौथा भाव: माता, सुख, घर, वाहन।
पाँचवाँ भाव: संतान, बुद्धि, शिक्षा, प्रेम संबंध।
छठा भाव: शत्रु, रोग, ऋण, नौकरी।
सातवाँ भाव: विवाह, साझेदारी, सार्वजनिक जीवन।
आठवाँ भाव: आयु, मृत्यु, रहस्य, अचानक लाभ/हानि।
नौंवाँ भाव: धर्म, भाग्य, पिता, लंबी यात्राएँ।
दसवाँ भाव: कर्म, व्यवसाय, पिता, मान-सम्मान।
ग्यारहवाँ भाव: आय, लाभ, बड़े भाई-बहन, इच्छापूर्ति।
बारहवाँ भाव: व्यय, हानि, मोक्ष, विदेश यात्रा।
एस्ट्रोलॉजी में उप-भाग/शाखाएँ
ज्योतिष शास्त्र एक विशाल विज्ञान है, जिसे अध्ययन और अनुप्रयोग के आधार पर कई शाखाओं में बांटा गया है: